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Complete information about IPO Gray Market | आईपीओ ग्रे मार्केट के बारे में पूरी जानकारी

 साल 2020 अपने साथ कोरोना नामक वैश्विक महामारी को लेकर आया जिसने पूरे विश्व के लोगों को किसी न किसी रूप में जरूर प्रभावित किया है लेकिन अगर हम शेयर मार्किट के परिदृश्य से देखे तो साल 2020 तथा अब तक साल 2021 में बहुत सारे IPO का आगमन मार्किट में हो चूका है। आए दिन हम यह न्यूज़ पढ़ते है या देखते है कि कल उस कंपनी का IPO आया था, आज से इतने दिनों बाद इस कंपनी का IPO आ रहा है, इस कंपनी का IPO अगले सप्ताह लांच हो रहा है आदि। अगर आप भी इस प्रकार की न्यूज़ में रूचि रखते है तो आपने एक शब्द और सुना होगा और वो है – Grey Market Premium

आपने IPO के बारे में न्यूज़ देखते हुए यह तो जरूर सुना होगा कि – कंपनी X के IPO का Grey Market Premium 40% है।

लेकिन क्या आप जानते है कि Grey market क्या होता है या फिर कंपनी के IPO लांच होने से पहले उसका Grey Market Premium क्या है।

IPO Grey Market क्या है:  इसके बारे में विस्तार से जानते है

IPO Grey Market को एक ऐसे मार्किट के रूप में समझा सकता है जहां पर ट्रेडर्स इनफॉर्मल रूप से कंपनी के शेयर्स की ट्रेडिंग करते है। कंपनी के शेयर्स जब तक IPO की प्रक्रिया के माध्यम से लांच होते है उससे पहले ही यह प्रक्रिया होती है।

चूँकि यह एक Unofficial मार्किट होता है इसलिए यहां पर किसी भी प्रकार के Rules या Regulations नहीं होते। इस प्रकार की ट्रेडिंग में सेबी भी किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होती।

Grey market में Unofficial मार्किट होने के कारण ही किसी प्रकार के नियम नहीं होते। मार्किट की निगरानी रखने वाले संस्थान जैसे सेबी आदि भी इस प्रकार के Transactions को ट्रैक नहीं करते।

Grey Market का सञ्चालन केवल कुछ लोगों द्वारा ही एक म्यूच्यूअल ट्रस्ट के हिसाब से किया जाता है।

जो भी कंपनी आईपीओ लॉंच करती है वो उससे पहले इसकी एक टेस्टिंग ग्रे मार्किट के माध्यम से करती है। कंपनी के ऐसा करने के पीछे कई कारन हो सकते है जैसे IPO वैल्यूएशन की गणना करना या फिर IPO की डिमांड का एक आईडिया लगाना।

Grey Market Premium (GMP) 

Grey Market Premium वो कीमत है जिसपे कंपनी के शेयर्स की ट्रेडिंग ग्रे मार्किट में होती है।

माना कि स्टॉक Z की Issue Price 100 रूपये है।

अगर ग्रे मार्किट प्रीमियम 200 रूपये है तो इसका मतलब यह हुआ कि एक रिटेल निवेशक उस कंपनी के शेयर को 300 रूपये (200+100) पर खरीदने के लिए राजी है।

ग्रे मार्किट में इसी प्रकार से Transactions होते है।

आइये इसको एक और उदाहरण से समझते है –

  •   माना कि Reliance Nippon की Issue Price 200 रूपये है तथा Reliance Nippon का ग्रे मार्किट प्रीमियम 50 रूपये है तो इस दी गई कंडीशन में GMP पॉजिटिव है। चूँकि प्रीमियम पॉजिटिव है इसलिए Reliance Nippon के शेयर्स की ट्रेडिंग 200+50 = 250 रूपये पर होती है।
  • अब अगर इसी उदाहरण में Reliance Nippon का GMP -30 रूपये है तथा Issue Price 200 रूपये है। चूँकि ग्रे मार्किट प्रीमियम नेगेटिव है इसलिए Reliance Nippon के शेयर्स को बेचने वाले निवेशकों के शेयर्स की ट्रेडिंग 30 रूपये के डिस्काउंट पर होगी (200-30 = 170)

यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि GMP बहुत ही ज्यादा वोलेटाइल होता है तथा जब तक शेयर्स की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज में शुरू नहीं हो जाती तब तक वोलैटिलिटी बनी रहती है।

Grey Market Trading क्यों की जाती है?

काफी लम्बे समय से ग्रे मार्किट का यह कांसेप्ट चलता आ रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर रिटेल इन्वेस्टर को यह लगता है कि किसी कंपनी के शेयर्स की कीमत भविष्य में बढ़ने वाली है तो इसके माध्यम से वे कंपनी के शेयर्स को इसके लिस्ट होने से पहले खरीद सकते है डिमांड तथा सप्लाई की अवधारणा पर ही यह ट्रेडिंग होती है।

इसके अलावा इसका दूसरा फायदा यह हो जाता है कि आईपीओ स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने से पहले ही ट्रेडर इस कंपनी से एग्जिट ले सकते है।

अगर कोई निवेशक आईपीओ के लिए किसी कारणवश अप्लाई नहीं कर पाए तो वो इसके माध्यम से आईपीओ में निवेश कर सकते है या फिर अप्लाई करने के बाद भी जो निवेशक और ज्यादा शेयर्स खरीदने की इच्छा रखते है वो भी इसके माध्यम से शेयर्स खरीद सकते हैकंपनियां Grey Market Trading को Allow क्यों करती है?

कंपनी के स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने से पहले ही ग्रे मार्किट ट्रेडिंग के जाती है। इसके माध्यम से Underwriters आईपीओ के वैल्यूएशन के बारे में जानकारी प्राप्त करते है। इसके माध्यम से Underwriters को कंपनी के शेयर की डिमांड तथा सप्लाई के बारे में भी पता लग जाता है तथा कंपनी की आगे की योजनाओं के बारे में भी निर्णय लेने में यह ट्रेडिंग सहायक होती है।

कंपनी के लिस्ट होने तथा Grey Market के बीच 6 दिनों का अंतराल होता है जिसमे Underwriters शेयर्स की सेल्लिंग शुरू कर देते है तथा ग्रे मार्किट में शेयर बेचने के लिए उत्सुक रहते है।

Kostak Rate क्या है?

किसी भी कंपनी के शेयर्स की लिस्टिंग से पहले अगर कोई निवेशक अपनी IPO Application को बेचकर जो Income करता है उसे Kostak Rate कहते है।

जो निवेशक IPO Allotment की रिस्क नहीं लेना चाहते उनके लिए यह बहुत फायदेमंद है।

सरल भाषा में अगर किसी निवेशक ने किसी आईपीओ के लिए Apply किया लेकिन वो उस आईपीओ को सब्सक्राइब नहीं करना चाहता तो वो अपनी Application को ग्रे मार्किट में किसी Interested Buyer को बेच सकते है। इस स्थिति में आईपीओ एप्लीकेशन इन्वेस्टर की ओर से उस Buyer द्वारा ही सब्सक्राइब की जाएगी तथा वो Buyer उस इन्वेस्टर को एक निश्चित राशि का भुगतान कर देगा। इस प्रक्रिया में इन्वेस्टर द्वारा कमाए गए प्रॉफिट को ही Kostak Rate कहते है।

Kostak Rate की वैल्यू अलग-अलग आईपीओ के हिसाब से अलग-अलग होती है। इसका बेनिफिट यह है कि Buyer को इसमें लाभ या हानि हो सकती है लेकिन इन्वेस्टर को फिक्स Kostak Rate का फायदा मिल जाएगा।

महत्वपूर्ण बिंदु –

  • IPO Grey Market Premium बहुत ही वोलेटाइल होता है तथा इसकी रेट्स में काफी ज्यादा उतार-चढाव आ सकते है। इसलिए Grey Market IPO Rates के आधार पर किस भी प्रकार के निवेश सम्बन्धी निर्णय लेना आपके लिए रिस्की हो सकता है।
  • IPO Grey Market Rates मार्किट के हिसाब से ऊपर-निचे होती है। GMP की रेट्स जियोग्राफी तथा मार्किट के हिसाब से अलग अलग हो सकती है।
  • Grey Market में प्रति शेयर IPO की रेट को ही IPO GMP के नाम से जाना जाता है।
  • ग्रे मार्किट में इन्वेस्टर द्वारा IPO Application की ट्रेडिंग करके जो धनराशि प्राप्त की जाती है उसको ही Kostak Rate के नाम से जाना जाता है।

निष्कर्ष –

तो इस प्रकार हमने यह जाना कि ग्रे मार्किट क्या होता है तथा यह किस प्रकार से कंपनियों तथा निवेशकों के लिए लाभदायक होता है।

चूँकि ग्रे मार्किट में किसी भी संस्था के Rule लागु नहीं होते लेकिन फिर भी इन्वेस्टर एक Undertaking देते है कि वे उन शेयर्स की भी खरीददारी करने के लिए राजी है जो अभी तक स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं हुए है।

आपको एक जागरूक निवेश के तौर पर हमेशा अपनी रिस्क उठाने की क्षमता के आधार पर ही काम करना चाहिए।

धन्यवाद !!

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