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Indian शेयर बाजार की सबसे बड़ी Bull Runs

 अगर आप भी शेयर मार्किट में निवेश करते है तथा इससे सम्बंधित विषयों में रूचि रखते है तो आपने यह तो जरूर सुना होगा कि ‘मार्केट crash हो गया’ या ‘मार्केट में बड़ी गिरावट देखी गई’। जब भी आप इस प्रकार की खबर सुनते है तो एक बार आपका भी शेयर मार्केट से मोहभंग तो जरूर होता होगा लेकिन चूँकि हर अंधेरी रात के बाद नया सवेरा होता है तो वैसे ही स्टॉक मार्केट में भी एक गिरावट के बाद बढ़ोतरी जरूर देखी जाती है।

आज के इस मार्केट में हम भारतीय शेयर के कुछ ऐसे ही Periods की बार करेंगे जब शेयर मार्केट में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई।

Bull Run का मतलब क्या है?

शेयर मार्केट में ‘Bull Run’ एक ऐसा समय होता है जब अधिकतर स्टॉक्स में बढ़ोतरी देखी जाती है। इसको सरल शब्दों में ऐसे समझा सकता है कि स्टॉक्स में आने वाली तेजी अनुमान से अधिक होती है।

Bullish Market में लगभग सभी निवेशकों का मार्केट के प्रति नजरिया सकारात्मक होता है तथा लोग शेयर मार्केट को एक सुरक्षित निवेश विकल्प मानने लगते है तथा अपना पैसा यहां निवेश करते है। इस सकारात्मक दृष्टिकोण का सबसे ज्यादा फायदा मिडकैप तथा स्मॉल कैप कंपनियों को मिलता है।

इस दौरान कंपनियों की शेयर्स की कीमत काफी तेजी से बढ़ने लगती है तथा अनेक नई कंपनियां भी खुद को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करवाना चाहती है। इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था में भी काफी सुधार देखने को मिलता है जिससे बहुत सारे FDIs (Foreign Direct Investments) भी हमारे देश में निवेश करने के लिए आतुर रहते है।

अब हम कुछ ऐसे ही समय अंतरालों की बात करेंगे जब भारतीय शेयर मार्केट में ऐसी Bull Runs देखी गई थी –

भारतीय शेयर मार्केट की प्रमुख Bull Runs –

1990-92 : The Mother of all Bull Runs

सबसे पहली Bull Run 25 जुलाई 1990 को स्टार्ट हुई जब सेंसेक्स ने पहली बार 4 अंकों का आंकड़ा छूया। 1 जुलाई 1990 को सेंसेक्स 920 पर कारोबार कर रहा था जबकि 25 जुलाई 1990 को यह 1001 पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कॉर्पोरेट नतीजे बेहतरीन थे तथा मानसून भी अच्छा था।

1991 में जब देश में आर्थिक संकट छाया हुआ था तब भी शेयर मार्केट में अच्छी खासी तेजी बनी हुई थी।

जनवरी 1991 में सेंसेक्स 1027 रुपये पर कारोबार कर रहा था लेकिन केवल 14 महीनों में ही 350% के रिटर्न के साथ इसकी कीमत अप्रैल 1992 में 4500 पर पहुंच गई थी। इसका मतलब निवेशित राशि 4 गुना हो गई थी। अगर किसी ने उस समय 1 लाख रुपये निवेश किए होते तो वो केवल 14 महीनों में ही 4.5 लाख में बदल चुके होते।

15 जनवरी को सेंसेक्स 2000 का आंकड़ा पार करते हुए 2020 पर बंद हुआ क्योंकि तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कुछ उदारवादी नीतियों का एलान किया था जैसे निजीकरण, वैश्विक उदारीकरण आदि। विदेशी निवेशक अब भारत में बड़ी पूंजी निवेश कर सकते थे। 29 फरवरी 1992 को वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने बजट की घोषणा की तथा बजट मार्केट के अनुकूल होने के कारण सेंसेक्स ने 3200 का नया आंकड़ा पार किया। इसी प्रकार उदारवादी आयत-निर्यात की नीतियों के कारण 30 मार्च 1992 को सेंसेक्स 4091 पर बंद हुआ।

लेकिन सेंसेक्स की इस अभूतपूर्व बढ़ोतरी के पीछे हर्षद शांतिलाल मेहता का हाथ था। उसने स्टॉक मार्केट को इस प्रकार से Manipulate किया कि ACC जैसा स्टॉक केवल 3 महीनों में ही 200 रूपये से 9000 रूपये पर पहुंच गया। स्थिति कुछ ऐसी थी कि किसी ने अगर इस स्टॉक में केवल 10,000 रूपये भी इन्वेस्ट किये होते तो वो केवल 3 महीनों में 4.5 लाख रूपये बन गए होते। 

सभी को भारतीय शेयर मार्केट एक सोने की चिड़िया प्रतीत हो रहा था। नाई की दुकानों में भी यह चर्चा होने लगी थी कि कौनसा स्टॉक ऊपर जाएगा तथा कौनसा नीचे। लेकिन लोगों को इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि वो एक ऐसी नाव में बैठे थे जो कभी भी पलट सकती थी। हर्षद मेहता स्कैम की खबर जैसे ही फैली, स्टॉक मार्केट 50% से ज्यादा गिर गया।

उस समय मार्केट इस प्रकार गिरा कि इसको वापस उस अप्रैल 1992 के उच्चतम स्तर 4500 तक आने में 5 साल लग गए। अगस्त 1997 में सेंसेक्स ने अपना उस समय तक का सर्वाधिक उच्चतम स्तर 4605 बनाया।

1998 – 2000 : तकनीकी तेजी का दौर

भारत में किए गए पोखरण परमाणु परीक्षण से पूरी दुनिया बौखला उठी तथा अनेक देशों ने हमारे देश पर विभिन्न प्रकार के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए जिसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स में बड़ी गिरावट आई तथा अक्टूबर 1998 में यह 2740 के स्तर तक गिर गया।

13 वें लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के कारण 8 अक्टूबर 1999 को सेंसेक्स ने 5000 का आंकड़ा छू लिया।

11 फरवरी 2000 को ही सेंसेक्स 6000 का आंकड़ा पार करते हुए 6006 पर बंद हुआ। केवल 16 महीनों में ही मार्केट ने लगभग 118% का रिटर्न दिया और पैसा 2.1 गुना हो गया अर्थात अगर आपने 1 लाख रूपये निवेश किए होते तो 16 महीनों में ही वो 2.1 लाख में बदल चुके होते। वैश्विक बाजारों में भी तेजी दिखने लगी तथा लोगों को Tech Companies में काफी संभानाएं नजर आने लगी।

एक बार मार्किट में फिर से जबरदस्त तेजी दिखी जब Wipro जैसी कंपनियों के शेयर जहां जनवरी 1999 में केवल 13.8 रुपये पर कारोबार कर रहे थे वही फरवरी 2000 में 334.8 के स्तर तक पहुंच गए। जनवरी 1999 में Infosys के शेयर की कीमत 11.59 रुपये थी जो 25 फरवरी 2000 को 140.43 रुपये पर पहुंच गई।

जनवरी 1999 से फरवरी 2000 के बीच Pentafour Software (Now Pentamedia Graphics) के शेयर में 364% की बढ़त देखी गयी।

बहुत सारी कंपनियों ने अपने नाम के पीछे Dot Com जोड़ा ताकि ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को आकर्षित किया जा सकें। सभी Tech companies के स्टॉक्स में बहुत ज्यादा Valuation देखा गया तथा बाजार में गिरावट आनी तय थी।

जब उन सभी झूठी कंपनियों का भंडाफोड़ हुआ तो केवल 3 महीनों में ही मार्केट 36.15% तक गिर गया।

Wipro Share price from 1999 to 2020; Notice the spike in its stock price in 1999.

Source: Google

Pentafour Software share price chart from 1999 to 2020. Look how it went high in 1999.

Source: Google

उसके बाद 9/11 का हमला हुआ जिसमे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को भी आतंकियों द्वारा निशाना बनाया गया था और इसके कारण सेंसेक्स गिरकर 2590 पर पहुंच गया।

सेंसेक्स में आई इस बड़ी गिरावट के बाद सेंसेक्स को फरवरी के स्तर (6000) तक वापिस उठने में 4 साल का समय लग गया और जनवरी 2004 में सेंसेक्स ने अपने उस समय तक के उच्चतम स्तर 6250 को छूया।

2004 – 2008 : रियल स्टेट सेक्टर की वापसी 

2004 से लेकर 2008 तक भारत विश्व की तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक था तथा वार्षिक वृद्धि दर 8-9% के आसपास थी। Infra, Pharma तथा FMCG सेक्टर में भारी बढ़ोतरी देखी गई। सेंसेक्स ने जनवरी 2004 में 6250 से लेकर जनवरी 2008 में 21,200 तक का सफर किया। 4 सालों मार्किट ने लगभग 236% रिटर्न दिया तथा जिसने भी इस दौरान मार्किट में निवेश किया उसका पैसा 3.4 गुना हो गया।

मुकेश अम्बानी तथा अनिल अम्बानी में हुए समझौते के फलस्वरूप सेंसेक्स ने 20 जून 2005 को पहली बार 7000 का आंकड़ा पार किया। इस डील के कारण निवेशकों में एक सकारात्मक सन्देश गया तथा RIL, Reliance Capital, Reliance Energy तथा IPCL के शेयर्स में काफी तेजी देखी गयी।

S&P BSE Realty Index; Notice the insane growth in 2007.

Source: Google

Reliance Capital share chart. Witness the spike from June 20, 2005, on account of settlement.

Source: Google 

मार्केट में आई इस तेजी के बाद मार्केट को 2008 की भयंकर मंदी का सामना करना पड़ा जब पूरे विश्व में एक वित्तीय संकट छा गया था। अनेक प्रकार के घोटाले सामने निकलकर आए जैसे 2G, Coal Gate, Vyapam Scam आदि।

इसी बीच Greece देश Default की कगार पर था जिसके कारण विदेशी निवेशकों में एक नकारात्मक सन्देश गया तथा दिसंबर 2008 तक आते आते सेंसेक्स 15,100 तक लुढ़क गया।

5 नवंबर 2010 को सेंसेक्स ने पुनः 21,000 का आंकड़ा छूया तथा 21,078 के उच्चतम स्तर तक गया। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि उस समय अमेरिकन शेयर मार्किट भी अपने All-time high पर कारोबार कर रहा था। भारतीय शेयर मार्केट में आई इस तेजी में विदेशी निवेशकों ने भी अच्छा पैसा कमाया।

इस भारी बढ़ोतरी में बैंकिंग तथा फाइनेंसियल सेक्टर के स्टॉक्स में एक अच्छी तेजी देखने को मिली लेकिन अगले 3 सालों तक यह रिकॉर्ड कायम रहा तथा 30 अक्टूबर 2013 को सेंसेक्स 21,033.97 पर बंद हुआ।

2013 – 14 : भाजपा के साथ विकास की आस 

13 मई 2014 को घोषित एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार देश में भाजपा की सरकार बनने की संभावना दिखाई दे रही थी। भारत को लम्बे समय से एक ऐसे नेता की जरूरत थी जो देश की फाइनेंशियल सिचुएशन को पटरी पर ला सकें। 

आशा के अनुरूप 7 जुलाई 2014 को सेंसेक्स ने 26,000 का आंकड़ा क्रॉस किया क्योंकि सरकार द्वारा घोषित बजट में एक विकसित राष्ट्र की और बढ़ने का प्रतिबिम्ब दिख रहा था।

रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट्स में भारी कटौती की तथा सेंसेक्स ने 4 मार्च 2014 को 30,000 का आंकड़ा पार किया। इससे मार्किट में लिक्विडिटी बढ़ गई तथा लोन भी काफी सस्ते हो गए।

Increase in Foreign inflows since 2014.

Source: Macrotrends.net 

2017 – 2020 : छोटे स्टॉक्स में बड़ी मूवमेंट 

साल 2017 में BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में 59.64% की वृद्धि दर्ज की गई जबकि अगले ही साल 2018 में BSE मिडकैप इंडेक्स में 48.13% की बढ़ोतरी देखी गयी। घरेलू बाजार में बढ़ती मांग ही इस जबरदस्त परफॉरमेंस का राज थी। रूपये की मजबूत स्थिति ने अनेक विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित किया।

2014 में एक स्टेबल गवर्नमेंट के निर्माण तथा अनेक अन्य कारणों के चलते अर्थव्यवस्था में काफी सुधार देखा गया। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिला तथा इस दौरान बहुत सारे mergers भी हुए।  

ऋण क्षेत्रों में काफी लचीलापन दिया गया तथा अर्थव्यवस्था में भी सुधार की गति तेज हो गयी। इससे अर्थव्यवस्था को चहुंमुखी फायदा हुआ। हाउसिंग, रियलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, बैंकिंग तथा ऑटोमोबाइल्स सेक्टर्स ने अच्छे तेजी दिखाई। 

Graphite India, Bhansali Engineering, Avanti Feeds, Bombay Dyeing तथा V2 Retail जैसे स्टॉक्स ने इस दौरान 300% से 800% तक का रिटर्न दिया। कुछ मिडकैप स्टॉक्स जैसे HEG तथा Indiabulls Ventures जैसे स्टॉक्स ने तो 1000% से ज्यादा बढ़ोतरी दिखाई। 

नोटबंदी के कारण भी शेयर्स में काफी तेजी देखी गयी क्योंकि लोगों ने अपनी धनराशि को छुपाने के लिए मार्केट में पैसा लगाना शुरू कर दिया था।

The rallying up of HEG stock price in 2017-18

Source: Google 

Bombay Dyeing stock surge in 2017-18

Source: Google

2018 के बाद 

मई 2019 में जब एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार फिर से एक बार मोदी सरकार के बनने के आसार दिखने लगे तो सेंसेक्स तथा निफ़्टी में काफी उछाल देखने को मिला। सेंसेक्स 39,352 के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ।

20 सितम्बर 2019 को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डोमेस्टिक कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स रेट्स में 30% से 22% तक की कटौती की घोषणा की तो एक बार फिर से 2.83% की वृद्धि दर्ज की गयी। वित्त मंत्री के इस कदम के पीछे भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का प्रयास था।

2020 तथा Covid-19 का माहौल 

21 मार्च 2020 को जब देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गयी तो सेंसेक्स में भारी गिरावट आई। 1 मार्च के मुकाबले सेंसेक्स 31% नीचे कारोबार कर रहा था। बाजार की स्थिति बहुत दयनीय हो गयी क्योंकि सभी रिटेल तथा विदेशी निवेशक मार्केट से अपना पैसा निकालना चाहते थे।

लेकिन मार्केट को पुनः रिकवर होने में केवल 4 महीने का समय लगा। चूँकि लोग पुनः शेयर मार्किट में निवेश करने की ओर आकर्षित हो रहे थे तथा लॉकडाउन के दौरान देश के बहुत ज्यादा लोगों ने शेयर मार्किट की दुनिया में कदम रखा इसलिए मार्केट वापस रिकवर हो गया। 

वर्तमान में स्थिति ऐसी हो गयी है कि लोग अब इकॉनमी को समझे बिना अंधाधुंध निवेश करने को आतुर है।

The stock market tanking down in March

Source: Google

निष्कर्ष 

Warren Buffett ने एक बार कहा था – “जब अन्य निवेशक लालची हो तो हमें भयभीत रहना चाहिए तथा जब अन्य निवेशक भयभीत हो तो हमें लालची हो जाना चाहिए”

इस बात को ध्यान में रखते हुए हमें हमेशा अपनी पूरी रिसर्च करके ही निवेश करना चाहिए।

शेयर मार्केट में निवेश करने वाले निवेशकों में कुछ ऐसे भी निवेशक होते है जो केवल टिप या झुठी ख़बरों पर यकीन करके अपने निवेश सम्बन्धी निर्णय ले लेते है तथा अपनी खून-पसीने की कमाई खो देते है तथा फिर वही लोग समाज में यह भ्रांति फ़ैलाते है कि स्टॉक मार्केट एक जुआ है।

जब भी हम निवेश करते है तो हम शॉर्ट टर्म में ही अच्छा रिटर्न कमाना चाहते है लेकिन हकीकत यह कि जब उस कंपनी का मालिक प्रॉफिट कमाने के लिए दशकों तक इंतजार कर सकता है तो फिर हम इतना जल्दी रिटर्न पाने की इच्छा क्यों रखते है?

हमें शेयर मार्केट में लॉन्ग टर्म के महत्व को समझना चाहिए तथा धैर्य बनके रखना चाहिए क्योंकि सफलता रातों रात या केवल एक दिन में नहीं मिलती लेकिन एक दिन मिलती जरूर है।

धन्यवाद !!

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