Gupta It Hub – Make Your Life Easy

Unique Magic of Compound Interest | कंपाउंड इंटरेस्ट का अनोखा जादू

हान वैज्ञानिक अल्बर्ट आईंस्टाईन ने कंपाउंड इंटरेस्ट को इस संसार का आठवां अजूबा बताया था। अगर इतना बड़ा वैज्ञानिक कंपाउंड इंटरेस्ट के बारे में इतनी बड़ी  बात कह सकता है तो इसमें कुछ तो ख़ास बात होगी।

तो आज के इस आर्टिकल में हम इसी कंपाउंड इंटरेस्ट के बारे में बात करने वाले है कि यह किस Sप्रकार से काम करता है तथा हम हमारे जीवन में इसका फायदा कैसे उठा सकते है।

कम्पाउंडिंग क्या है?

अगर हम आसान भाषा में बात करे तो कम्पाउंडिंग का मतलब यह होता है – हमारे इन्वेस्टमेंट पर मिलने वाले इंटरेस्ट की वजह से तथा उस इंटरेस्ट पर भी मिलने वाले इंटरेस्ट की वजह से हमारी इन्वेस्टमेंट की वैल्यू में बढ़ोतरी होना।

इसका मुख्य सिद्धांत तो यही है कि ब्याज पर भी ब्याज मिलना। जब भी हमारी मूल राशि पर हमें कुछ इंटरेस्ट मिलता है तो वह इंटरेस्ट फिर हमारी मूल राशि की तरह कार्य करता है तथा फिर उस पर भी ब्याज मिलता है।

अगर आपने भी कभी बर्फीली पहाड़ियों पर बर्फ की लुढ़कती हुई गेंदों को ध्यान से देखा होगा तो आपने यह जरूर ध्यान दिया होगा कि वह गेंद अपने साथ लगातार ज्यादा बर्फ इकठ्ठी करती जाती है तथा उसका साइज भी बढ़ता जाता है। इसी प्रकार से कंपाउंड इंटरेस्ट में हमारी मूल राशि तथा उसपे मिलने वाले ब्याज पर भी ब्याज मिलता है जिसके कारण हमारी राशि लगातार बढ़ती जाती है।

आइये एक उदाहरण से इसको अच्छे से समझते है –

दो फ्रेंड X तथा Y एक ऐसे फण्ड में इन्वेस्ट करते है जिसमे उनको 10% वार्षिक रिटर्न मिलता है X के फण्ड में उसको कंपाउंड इंटरेस्ट मिलता है तथा Y को केवल साधारण इंटरेस्ट मिलता है तो 10 वर्ष बाद उनके रिटर्न इस प्रकार से होंगे –

विवरण

Mr X

Mr Y

निवेश की गयी राशि

10 lakhs

10 lakhs 

1 साल बाद कुल राशि  

11,00,000

11,00,000

2 साल बाद कुल राशि   

12,10,000

12,00,000

10 साल बाद कुल राशि  

25,93,742

20,00,000

आप ऊपर दी गयी टेबल से इस बात का आसानी से अंदाजा लगा सकते है कि कंपाउंड इंटरेस्ट सरल ब्याज की तुलना में किस प्रकार से ज्यादा रिटर्न देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कंपाउंड इंटरेस्ट में आपको अपनी मूल राशि 10 लाख तथा उसके बाद इसके ब्याज 1 लाख तथा उसके बाद ब्याज 2.1 लाख तथा इसी प्रकार से ब्याज का भी ब्याज मिलता जाता है। इसी कारण 10 साल बाद आपकी टोटल अमाउंट में काफी इजाफा देखने को मिलता है।

कंपाउंड इंटरेस्ट की गणना के लिए अनेक ऑनलाइन कैलकुलेटर मौजूद है जहां से आप आसानी से अपने कंपाउंड इंटरेस्ट की गणना कर सकते है।

अगर आप खुद से इसकी गणना करना चाहते है तो आप इस फार्मूला का उपयोग करते हुए इसकी कैलकुलेशन कर सकते है –

A = P (1 + [ r / n ]) ^ nt

P = Principal Amount (मूल धन)

r = rate of interest

n = is the no. of Compounding

t = is the period the principal was invested for

कंपाउंड इंटरेस्ट का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने के 3 नियम –

अब हमने इस बात को तो अच्छी तरह से समझ लिया कि कंपाउंड इंटरेस्ट क्या होता है तथा यह कैसे काम करता है लेकिन अब हम यह जानेंगे कि आप इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा किस प्रकार से उठा सकते है –

आप इन तीन नियमों की सहायता से इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकते है –

कम्पाउंडिंग को स्मार्टली समझना 

हालाँकि कंपाउंड इंटरेस्ट एक बहुत ही लाभदायक कांसेप्ट प्रतीत होता है लेकिन फिर भी अगर आप इसको अच्छे से न समझे तो इसके उल्ट आपको नुकसान भी उठाना सकता है। आपको इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि जिस गति से कंपाउंड इंटरेस्ट की वजह से आपकी धनराशि बढ़ती है उसी गति से आपकी उधार ली गयी राशि पर भी कंपाउंड इंटरेस्ट की वजह से भारी ब्याज भी लग सकता है। अगर आपने किसी प्रकार का लोन ले रखा है तथा उसपे आपको कंपाउंड इंटरेस्ट लग रहा है तो आपको सावधानी से काम लेने की जरूरत है।

माना आपने किसी से 1000 रूपये उधार लिए तथा इसपे आपको सरल ब्याज की बजाय कंपाउंड इंटरेस्ट लग रहा है तो आपको इसमें अपनी अपेक्षित राशि से ज्यादा का भुगतान करना पड़ेगा क्योंकि जिस व्यक्ति ने आपको वो पैसे उधार दिए है उसको कंपाउंड इंटरेस्ट का लाभ मिलेगा तथा उसी हिसाब से आपको कंपाउंड इंटरेस्ट के कारण ज्यादा ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा।

लॉन्ग टर्म का फायदा 

अगर आप भी इन्वेस्ट करके ज्यादा से ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते है तो उसमे समय का बहुत बड़ा योगदान रहने वाला है। आपकी धनराशि जितने ज्यादा समय के लिए निवेशित रहेगी उतना ही ज्यादा रिटर्न आपको मिलेगा क्योंकि कंपाउंड इंटरेस्ट में Exponential Growth का फायदा आपको मिलता है। लोग थोड़ा सा प्रॉफिट देखने के बाद अपनी राशि को Withdraw कर लेते है लेकिन वो इस बात को भूल जाते है कि कंपाउंड इंटरेस्ट का अच्छे वाला फायदा तो लॉन्ग टर्म में ही मिलता है इसलिए आपको हमेशा लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहिए।

इसके अलावा कंपाउंड इंटरेस्ट का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने के लिए आपको जितना जल्दी संभव हो उतना जल्दी निवेश करना शुरू कर देना चाहिए। अगर आप 20 साल की उम्र में निवेश करना शुरू करते हो तथा आपका फ्रेंड 30 साल की उम्र में शुरू करता है तो आपको इन अतिरिक्त 10 सालों का बहुत ज्यादा फायदा लॉन्ग टर्म में मिलने वाला है।

रेट्स पर एक नजर रखना 

कंपाउंड इंटरेस्ट का सबसे महत्वपूर्ण भाग है इसकी रेट अर्थात आपको किस रेट पर कंपाउंड इंटरेस्ट मिलने वाला है। अलग-अलग निवेश पर आपको अलग-अलग रेट्स देखने को मिलेगी।  इसलिए एक निवेशक के तौर पर आपके लिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि आप इसकी रेट्स का अच्छे से एनालिसिस करे तथा उसके बाद ही निवेश विकल्प का चयन करे।

आइये एक बार इस टेबल पर के नजर डालते है –

Different securities 

Interest rates 

Bank-based savings account

4 – 5%

Debt funds

7 – 8%

Equity-based mutual funds

12 – 13%

Shares 

15 – 16%

ऊपर दिखाई गयी रेट्स विभिन्न प्रकार के निवेश विकल्पों में मिलने वाले एवरेज रिटर्न को दर्शाती है। इसलिए ऐसा भी संभव है कि आपका पोर्टफोलियो ऊपर दिखाई गयी रेट्स से बहुत ज्यादा या कम रिटर्न देता हो।

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि आपको अपने निवेश पर मिलने वाले कंपाउंड इंटरेस्ट की रेट्स का एनालिसिस करते रहना चाहिए तथा अपने फाइनेंसियल गोल्स व जोखिम उठाने क्षमता के आधार पर अपने लिए सही निर्णय लेना चाहिए। अगर आप किसी से पैसे उधार ले रहे है तो भी आपको रेट्स पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि आपको अज्ञानवश ज्यादा ब्याज का भुगतान न करना पड़ जाए। इसके अलावा निवेश करते समय इसके रिटर्न पर लगने वाले टैक्स के बारे में भी आपको जानकारी रखनी चाहिए।

ऊपर दिए गए तीन नियम कंपाउंड इंटरेस्ट के सन्दर्भ में काफी लाभदायक है लेकिन इसके अलावा आपको एक और नियम के बारे में विशेष तौर से ध्यान रखना है और वो है – अनुशासन। क्योंकि निवेश करके अच्छा रिटर्न कमाने के लिए अनुशासन का भी बहुत बड़ा  योगदान रहता है। एक अनुशासित निवेशक को इस बात के बारे में अच्छे से पता रहता है कि किस प्रकार से इमोशंस में न आकर अपने लिए अच्छे निर्णय लेने है।

इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण फैक्टर है – Patience यानि धैर्य।    महान निवेशक Warren Buffet ने भी इस पर काफी प्रकाश डाला है तथा इसको अच्छे रिटर्न प्राप्त करने का एक कारक बताया है।

निष्कर्ष 

किसी भी नई चीज को सिखने के बाद उसको जब तक रियल लाइफ में इम्प्लीमेंट न किया जाए तब तक हमें उस नॉलेज या स्किल का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

इसलिए आपको  भी कंपाउंड इंटरेस्ट के बारे में सिखने के बाद इसको अपने निवेश में लागु करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए ताकि आप इसके जादू का फायदा उठा सकें।

धन्यवाद !!

0

Leave a Comment